सिटी बिग न्यूज | हिसार
किसान 6 महीने तक कड़ी मेहनत करके फसल को तैयार करता है और अंत में वह किसी प्राकृतिक घटना आंधी, तूफान या आग की भेंट चढ़ जाती है जिससे किसानों की मेहनत पूरी मेहनत तो बर्बाद होती है उसे बड़ा आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ता है।
गर्मी के मौसम में गेहूं की पकी हुई फसल में आग लगने की घटनाएं निरंतर बढ़ रही है जिससे किसानों को भारी नुकसान हो रहा है। आग की वजह से बर्बाद हुई फसल के लिए सरकार किसानों को एक लाख रुपये प्रति एकड़ का मुआवजा दे। यह बात हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सदस्य एवं पूर्व जिला अध्यक्ष किसान कांग्रेस राजेश संदलाना ने कही।
राजेश संदलाना ने कहा कि एक तरफ तो किसानों को प्राकृतिक आपदा का सामना करना पड़ता है वहीं दूसरी ओर मंडियों में उन्हें अपनी फसल बेचने के लिए कई-कई दिन इंतजार करना पड़ता है। किसानों का सोना गेहूं सरकार की बदइंतजामी की चलते सडक़ों पर बर्बाद हो जाता है।
भंडारण की क्षमता नहीं होने व पहले से सरकार द्वारा फसल के लिए कोई इंतजाम नहीं करने के कारण किसानों को सडक़ों पर अपना गेहूं डालना पड़ता है जिससे उनकी फसल की बर्बादी होती है। वहीं किसानों के लिए मंडियों में सरकार द्वारा उनकी सुविधा के लिए कोई इंतजाम भी नहीं किए जाते चिलचिलाती धूप में अपने ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में लाइनों में लगकर उन्हें अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है।
राजेश संदलाना ने कहा कि सरकार तुरंत प्रभाव से आगजनी से बर्बाद हुई फसलों का मुआवजा प्रति एकड़ 1 लाख रुपया किसानों को दे और उनकी फसल की खरीद के लिए मंडियों में पर्याप्त इंतजाम किए जाएं।







































