हिसार के किसान-वर्दीधारी जागरूकता दूत विक्रम सिंधु को प्राकृतिक खेती में योगदान के लिए मिलेगा बड़ा सम्मान; 46 हजार किसानों को दे चुके ट्रेनिंग
हिसार के किसान और हरियाणा पुलिस में तैनात जवान विक्रम सिंधु को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), पूसा, नई दिल्ली में 7 से 9 दिसंबर तक आयोजित होने वाले राष्ट्रीय समारोह में सम्मानित किया जाएगा। प्राकृतिक खेती को गांव-गांव तक पहुंचाने और हजारों किसानों को प्रशिक्षित करने के लिए उन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया जा रहा है।
पिछले 14 वर्षों से विक्रम सिंधु अपनी कमाई का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा प्राकृतिक और ज़हरमुक्त खेती के प्रचार पर खर्च कर रहे हैं। उनका मानना है कि खेती तभी टिकाऊ रह सकती है, जब किसान मिट्टी, पानी और प्रकृति को नुकसान पहुंचाए बिना उत्पादन करें।
खेत में काम करते हुए विक्रम सिंधु।
अपने खेत को बनाया ‘प्राकृतिक प्रयोगशाला’
विक्रम सिंधु खुद भी प्राकृतिक तरीके से खेती करते हैं। उन्होंने अपने खेत को एक प्रशिक्षण केंद्र में बदल दिया है, जहां देश और विदेश से आने वाले किसान बीज बोने से लेकर फसल को बाजार तक पहुंचाने तक की पूरी प्रक्रिया सीखते हैं—वह भी बिना किसी शुल्क के।
अब तक 46 हजार से ज्यादा किसान उनकी ट्रेनिंग ले चुके हैं। किसान यहां कम लागत, बिना रसायन और कम पानी में बेहतर उत्पादन हासिल करने के तरीके सीखते हैं। साथ ही वे किसानों को प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और सीधे बाजार में बिक्री करने के गुर भी सिखाते हैं, जिससे किसानों की आमदनी कई गुना बढ़ सके।
मिट्टी बचाओ, पानी बचाओ—विक्रम का मिशन
रासायनिक खेती की वजह से खराब हो रही मिट्टी और प्रदूषित भूजल को लेकर विक्रम सिंधु लंबे समय से चिंतित हैं। उनका कहना है कि अगर खेती की दिशा नहीं बदली गई, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए धरती बंजर हो जाएगी। इसी सोच के साथ वे प्राकृतिक खेती के माध्यम से मिट्टी की उर्वरता और जलस्तर में सुधार का अभियान चला रहे हैं।
उनका मॉडल केवल कृषि तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण विकास के लिए एक मजबूत और टिकाऊ ढांचा बनाने का मार्ग भी दिखा रहा है।
8 दिसंबर को मिलेगा ‘कृषि जगत का ऑस्कर’
ICAR के कार्यक्रम में विक्रम सिंधु को 8 दिसंबर को वह सम्मान दिया जाएगा जिसे लोग ‘कृषि जगत का ऑस्कर’ भी कहते हैं। यह उपलब्धि न केवल विक्रम के लिए, बल्कि हरियाणा और पूरे देश के उन किसानों के लिए बड़ी प्रेरणा है जो रसायनों से छुटकारा पाकर प्राकृतिक खेती की राह पर आगे बढ़ रहे हैं।

खेत में काम करते हुए विक्रम सिंधु।
विक्रम सिंधु कहते हैं—
“हमारा लक्ष्य किसानों को कर्ज से मुक्त करना और उपभोक्ताओं तक शुद्ध भोजन पहुंचाना है। जब किसान आत्मनिर्भर होगा, तभी गांव और देश मजबूत बनेंगे।”
उनकी यह कहानी बताती है कि अगर इरादे साफ हों और मेहनत निरंतर हो, तो केवल एक किसान भी हजारों लोगों की सोच और भविष्य बदल सकता है।








































