हिसार जिले के बास थाना क्षेत्र में पराली जलाने पर सरकार ने कड़ी कार्रवाई की। मैहन्दा और घुसकानी गांवों में खेतों में पराली जलाने की पुष्टि के बाद किसानों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें से एक किसान को मैहन्दा गांव में 5000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
मैहन्दा मामला
मैहन्दा में कृषि, राजस्व और पंचायत विभागों की एक संयुक्त टीम ने मौका की जाँच की । निरिक्षण में पता चला कि किसान दिनेश ने लगभग एक एकड़ क्षेत्र में धान की पराली जलाई थी। भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 और वायु प्रदूषण अधिनियम 1981 इस कार्य को दंडनीय मानते हैं।
पटवारी गुरमीत सिंह, कृषि पर्यवेक्षक मनोज, ग्राम सचिव भूपेंद्र और नंबरदार ने कार्य किया। किसान को पांच हजार रुपये का चालान थमाया गया और बास थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है।
घुसकानी गांव में भी कार्रवाई की
घुसकानी गांव में दूसरी कार्रवाई की गई। हरसैक की सैटेलाइट रिपोर्ट के आधार पर गांव स्तरीय समिति मौके पर पहुंची। यहां पुष्टि हुई कि किसान राममेहर ने भी अपने खेत में पराली जलाई थी। बास थाना पुलिस ने इस पर धारा 223(A) और वायु प्रदूषण नियंत्रण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की है।
प्रशासन ने सख्त चेतावनी दी


किसान पराली को आग लगते हुए।
दोनों मामलों की रिपोर्ट बास थाना के एसएचओ बलवान सिंह को भेजी गई है। प्रशासन ने स्पष्ट रूप से कहा है कि पराली जलाने से हवा जहरीली होती है, प्रदूषण बढ़ता है और लोगों की सेहत पर सीधा असर पड़ता है।
अधिकारियों ने किसानों से अपील की है कि वे पराली को नियंत्रित करने के लिए विकल्पों (जैसे कम्पोस्टिंग, सुपर स्ट्रॉ, हैप्पी सीडर) का उपयोग करें। अगर ऐसा नहीं होता तो और कठोर कार्रवाई की जाएगी।







































