हिसार जिले का प्राचीन नगर राखीगढ़ी एक बार पुनः अपनी ऐतिहासिक पहचान को नई रोशनी में सामने लाने जा रहा है। नारनौंद के पास स्थित यह विश्व प्रसिद्ध पुरातात्विक स्थल 26 से 28 दिसंबर तक ‘राखीगढ़ी महोत्सव-2025’ का मेज़बान बनेगा। तीन दिनों तक यहां इतिहास, संस्कृति और खेलकूद का समावेश देखने को मिलेगा।
महोत्सव का आयोजन पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग कर रहा है। इस बार कार्यक्रम को हाइब्रिड मोड में रखा गया है, यानी प्रतिभागी चाहे तो राखीगढ़ी पहुंचकर शामिल हो सकते हैं या फिर ऑनलाइन जुड़ सकते हैं। मंगलवार को विभाग के निदेशक अमित खत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से तैयारियों की समीक्षा की। बैठक में हिसार के उपायुक्त अनीश यादव, नारनौंद एसडीएम विकास यादव, हिसार एसडीएम ज्योति मित्तल समेत कई बड़े अधिकारी शामिल रहे।

DC अनीश कुमार यादव राखीगढ़ी महोत्सव के लिए बैठक करते।
उपायुक्त अनीश यादव ने कहा कि राखीगढ़ी केवल एक पुरातत्व स्थल नहीं, बल्कि हमारी 5000 साल पुरानी शहरी सभ्यता का जीवंत प्रमाण है। यह महोत्सव युवाओं को अपनी जड़ों को जानने और समझने का मौका देगा।
महोत्सव में क्या-क्या होगा?
एएसआई की ओर से खुदाई, खोज और संरक्षण से जुड़ी जानकारियों की विशेष प्रदर्शनी
विद्यार्थियों के लिए हेरिटेज वॉक, म्यूजियम भ्रमण, सेमिनार और वर्कशॉप
विशेषज्ञ इतिहासकारों द्वारा सिंधु-सरस्वती सभ्यता से जुड़ी वैज्ञानिक और सांस्कृतिक उपलब्धियों पर व्याख्यान
इनामी कुश्ती-दंगल, कबड्डी और पारंपरिक ग्रामीण खेल
फूड स्टॉल, स्वयं सहायता समूहों के उत्पाद, और सरकारी योजनाओं से जुड़े जागरूकता केंद्र
हर शाम लोक कलाकारों के संघ सांस्कृतिक संध्या, जिसमें हरियाणवी संस्कृति की वास्तविक पहचान देखने को मोलेगी |
पिछली बार कैबिनेट मंत्री अरविन्द शर्मा ने किया था महोत्सव का उद्घाटन।
पिछले वर्ष अधूरा रह गया था आयोजन
साल 2024 में यह महोत्सव 20 से 22 दिसंबर तक होना तय था, लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला के देहांत के कारण बाकी कार्यक्रम स्थगित करना पड़ा। इस बार प्रशासन और विभाग ने पहले से ही व्यापक तैयारी शुरू कर दी है, ताकि आयोजन व्यवस्थित और प्रभावशाली हो।
राखीगढ़ी क्यों है विश्व के लिए खास?
यहां की खुदाई में जो प्रमाण मिले हैं, वे बताते हैं कि यहां उन्नत नगर व्यवस्था थी—घर, नालियां, अनाज भंडारण, चूल्हे, धातुकर्म, मनके निर्माण और व्यापार जैसी गतिविधियां यहां आम थीं। यह स्थल 350 हेक्टेयर से भी अधिक क्षेत्र में फैला हुआ है, जो इसे सिंधु सभ्यता के सबसे बड़े और विकसित केंद्रों में शामिल करता है।
खुदाई के समय मिले मिट्टी के बर्तन।
उद्देश्य
महोत्सव का मुख्य लक्ष्य स्थानीय युवाओं और विद्यार्थियों में इतिहास, शोध और विरासत संरक्षण के प्रति रुचि बढ़ाना है, ताकि राखीगढ़ी सिर्फ किताबों और संग्रहालयों तक ही सिमटकर नहीं बल्कि जनमानस की स्मृति और पहचान का हिस्सा बन सके।







































