हिसार की अदालत ने अग्रोहा में चार साल पुराने झगडे से जुड़े मामले में माँ मनो देवी और उनकी बेटी सुनीता को हत्या करने की कोशिश का दोषी ठहराते हुए तीन साल कैद की सजा सुनाई। दोनों पर 500 – 500 रूपए का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना न भरने पर एक महीने की सजा अधिक काटनी होगी।
अदालत ने सजा सुनाते दौरान दोनों महिलाओ की उम्र ,आर्थिक और सामाजिक स्थिति को ध्यान में रखा , लेकिन प्रोबेशन का लाभ नहीं दिया और ट्रायल के दौरान बिताई गई अवधि के आधार पर रिहाई नहीं दी। अदालत ने कहा कि दोषियों ने अपने काम के परिणामों को जानते हुए भी अपराध किया; हालांकि, यह भी सच है कि दोषियों की जीवनशैली को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।
मामला 2020 के झगड़े से जुड़ा था
यह मामला फरवरी 2020 में अग्रोहा के गांव संडोल में हुए विवाद से जुड़ा है, जिसमें गांव निवासी जसवंत सिंह की मौत हो गई थी। पुलिस ने घटना के बाद सुनील, प्रदीप, मोनी देवी, सुनीता और निर्मला के खिलाफ BNS की धारा 147, 149 और 302 के तहत केस दर्ज किया था। चार साल नौ महीने से अधिक समय तक सुनवाई चलने के बाद अदालत ने दोष पर निर्णय सुनाया।

अदालत की टिप्पणी: परिणाम पता था, फिर भी अपराध किया
अपने आदेश में कोर्ट ने कहा कि किसी भी अपराधी को पूर्णत: अपराधमुक्त या पूरी तरह अपरिवर्तनीय मानना उचित नहीं है। न्यायालय के अनुसार सजा तय करते समय अपराध की प्रकृति, दोषियों की उम्र, उनका पूर्व रिकॉर्ड और सुधार की संभावना सभी महत्वपूर्ण पहलू होते हैं।
कोर्ट ने माना कि आरोपियों को अपने कार्य के संभावित नतीजों की जानकारी होने के बावजूद उन्होंने ऐसा किया—यह परिस्थिति उनके खिलाफ गई।
बचाव पक्ष ने दी गरीबी और पारिवारिक स्थिति की दलील
सजा से पहले बचाव पक्ष ने अदालत से नरमी बरतने की अपील की।
मोनी देवी ने खुद को 60 वर्षीय विधवा बताया, जो मजदूरी कर चार बच्चों का पालन-पोषण करती हैं।
सुनीता देवी ने अपनी 9 वर्षीय बेटी और बीमार सास की जिम्मेदारी का हवाला दिया। उन्होंने बताया कि उनके पति काम के कारण घर से दूर रहते हैं और पूरा घर उनसे ही चलता है।
वकील ने कहा कि दोनों बेहद गरीब हैं और कठोर सजा उनके परिवारों को और संकट में डाल देगी।

क्या हुआ था उस दिन: दो बिंदुओं में समझें
1. पुराना विवाद
पीड़ित पक्ष के अनुसार, जसवंत सिंह ने अपने मकान के पीछे शौचालय बनाया हुआ था। उसकी सफाई के लिए जब भी ट्रैक्टर आता था, पड़ोसी परिवार—मोनी देवी और उनके परिजन—इसका विरोध करते थे। कुछ दिन पहले पंचायत में इस विवाद को सुलझाया भी गया था।
2. झगड़े के दौरान जसवंत की मौत
20 फरवरी 2020 को जसवंत सिंह शौचालय के पास पहुंचे तो सुनील, प्रदीप, मोनी देवी, सुनीता और निर्मला वहां पहुंचकर झगड़ा करने लगे और उन पर ईंट-पत्थर फेंके। शोर सुनकर परिवार की महिलाएँ पूजा और रत्नकौर भी बाहर आईं।
आरोप है कि पांचों आरोपियों ने मिलकर जसवंत को घेर लिया, थप्पड़-मुक्के मारे और जान से मारने की नीयत से जमीन पर धक्का दे दिया। जसवंत को तत्काल अग्रोहा मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।







































