हरियाणा कांग्रेस अनुशासन समिति के अध्यक्ष धर्मपाल मलिक ने कहा कि पूर्व मंत्री संपत सिंह ने संगठन के निर्णयों को चुनौती दी और पार्टी लाइन के खिलाफ लगातार बयान दिए। ऐसे परिस्थितियों में उनका कांग्रेस छोड़ना तय था।
धर्मपाल मलिक ने कहा कि संपत सिंह को समिति के सक्रिय होते ही पता चला कि उन पर कार्रवाई हो सकती है, इसलिए उन्होंने खुद इस्तीफा देना बेहतर समझा। मलिक ने कहा कि पार्टी के मूल्यों के खिलाफ खड़े होने वाले लोग अंततः अलग हो जाते हैं ।
राजनीतिक करियर में संपत सिंह ने कई बार दल बदले हैं, मलिक ने कहा—
पहले इनेलो छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए, फिर कुछ समय बाद भाजपा में चले गए, लेकिन सत्ता के अवसर बदलते ही वापस कांग्रेस में लौट आए।
अपने बेटे गौरव सिंह के साथ अब वे फिर से इनेलो में हैं।

सम्पत सिंह ने अपने बेटे के साथ INLD ज्वाइन कर ली।
धर्मपाल मलिक ने इसे “सत्ता और पद पाने की राजनीति” बताया और कहा कि ऐसे लोगों के जाने से कांग्रेस को कोई नुकसान नहीं होगा क्योंकि पार्टी उन लोगों की है जो सिद्धांतों के साथ मुश्किल समय में भी खड़े रहते हैं।
“कांग्रेस संविधान की रक्षा की लड़ाई में है”
उनका कहना था कि आज कांग्रेस राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के नेतृत्व में देश के लोकतंत्र और संविधान की रक्षा की लड़ाई लड़ रही है।
पार्टी को ऐसे कार्यकर्ताओं की जरूरत है जो राष्ट्रहित को प्राथमिकता दें, न कि निजी लाभ।
मलिक ने कहा कि लोग अब जानते हैं कि कौन विचारधारा के लिए राजनीति करता है और कौन सिर्फ मौके पर पार्टी बदलता है।







































