हरियाणा के हिसार जिले के नारनौंद क्षेत्र के गांव खांडा खेड़ी के जवान हवलदार पवन सिंधु अरुणाचल प्रदेश में ड्यूटी के दौरान शहीद हो गए। वे पेट्रोलिंग के समय पहाड़ी से फिसलकर खाई में गिर पड़े, जिससे उनकी मौके पर ही मृत्यु हो गई।
गांव में सुबह से ही माहौल भावुक है। लोग शहीद के घर पहुंचकर परिवार को ढांढस बंधा रहे हैं। गांव की गलियों में मातम पसरा है, लेकिन साथ ही बेटे की शहादत पर गर्व की भावना भी झलक रही है। शहीद का अंतिम संस्कार आज शाम करीब 4:30 बजे उनके पैतृक गांव में पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा। सेना, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहेंगे।
हवलदार पवन सिंधु 13 राजपूताना राइफल्स में तैनात थे। इन दिनों वे अरुणाचल प्रदेश में चीन सीमा के पास बड़ा रूपक क्षेत्र में अपनी यूनिट के साथ तैनाती पर थे। यूनिट को 13 दिन की ऊंची पहाड़ियों पर पेट्रोलिंग का कार्य सौंपा गया था। शुक्रवार को पेट्रोलिंग के अंतिम दिन, पवन सिंधु पहाड़ी किनारे खड़े थे तभी उनका पैर फिसल गया और वे गहरी खाई में जा गिरे।
साथी जवानों ने तुरंत रेस्क्यू शुरू किया और उन्हें बाहर निकाला, लेकिन सिर में गंभीर चोट लगने के कारण उन्होंने दम तोड़ दिया। शनिवार को सैन्य अस्पताल में पोस्टमार्टम के बाद उनका पार्थिव शरीर दिल्ली लाया गया, जहां सेना और प्रशासनिक अधिकारियों ने श्रद्धांजलि दी। दोपहर करीब साढ़े 12 बजे दिल्ली एयरपोर्ट पर उन्हें अंतिम सलामी दी गई। शहीद पवन सिंधु, जो अरुणाचल प्रदेश में शहीद हुए हैं।
पवन सिंधु ने 2003 में भारतीय सेना ज्वॉइन की थी। तीन साल बाद, 2006 में उनका विवाह झमोला गांव की रीतू से हुआ। उनके दो बेटे हैं — 17 वर्षीय सौम्य और 16 वर्षीय विनय, जो फिलहाल जुलाना के एक निजी स्कूल में 11वीं कक्षा में पढ़ रहे हैं
गांव के लोगों का कहना है कि पवन हमेशा हंसमुख और जिम्मेदार स्वभाव के थे। जब भी छुट्टी पर घर आते, बच्चों और बुजुर्गों से घुल-मिल जाते थे। गांव के एक बुजुर्ग ने नम आंखों से कहा —
“पवन बचपन से ही देश की सेवा करना चाहता था। आज उसने वो सपना पूरा किया, पर इस क़ीमत पर नहीं…”
गांव के हर कोने में अब यही चर्चा है — “खांडा खेड़ी का बेटा देश के लिए कुर्बान हो गया।”
लोगों का कहना है कि पवन सिंधु की शहादत आने वाली पीढ़ियों के लिए साहस और देशभक्ति की मिसाल बनकर हमेशा याद रखी जाएगी।







































