बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना चक्रवात मोन्था अब एक तूफान में तब्दील हो गया है।
मंगलवार सुबह यह मछलीपट्टनम से करीब 190 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में केंद्रित था।
मौसम विभाग के मुताबिक, आज शाम तक यह काकीनाड़ा के पास तट से टकराएगा — मछलीपट्टनम और कलिंगपट्टनम के बीच।
लैंडफॉल के वक्त 5 मीटर यानी 16 फीट तक ऊंची लहरें उठने की संभावना है।
आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, ओडिशा और बंगाल के तटीय जिलों में 90 से 110 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल रही हैं।
अब तक 50,000 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया जा चुका है और 55 से अधिक ट्रेनें रद्द की गई हैं।
कई जिलों में स्कूल बंद हैं और प्रशासन ने मछुआरों को समुद्र से दूर रहने की सख्त चेतावनी दी है।

राज्यवार हालात
आंध्र प्रदेश:
मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने बताया कि 3,778 गांवों में भारी बारिश की संभावना है।
राज्य में 3,174 राहत शिविर बनाए गए हैं।
काकीनाड़ा और विशाखापट्टनम तटों पर समुद्र उफान पर है, मछुआरों को समुद्र में न जाने की हिदायत दी गई है।
आंध्र प्रदेश- विशाखापट्टनम में प्रशासन ने मछुआरों को बंगाल की खाड़ी में न जाने की सलाह दी गई है तमिलनाडु:चेन्नई और आसपास के जिलों रानीपेट, तिरुवल्लूर और कांचीपुरम में भारी बारिश का अलर्ट है।तिरुवल्लूर जिले में मंगलवार को स्कूलों में छुट्टी घोषित कर दी गई है।पट्टिनापक्कम बीच पर लहरें उफान पर हैं, मछुआरे अपनी नावों को तट पर सुरक्षित कर रहे हैं।
ओडिशा:
गंजम के आर्यपल्ली में समुद्र में ऊंची लहरें उठ रही हैं।
राज्य में 24 ODRAF, 5 NDRF और 99 फायर सर्विस की टीमें, यानी करीब 5,000 कर्मी, राहत कार्य में जुटे हैं।
गोपालपुर बंदरगाह पर 50 मछली पकड़ने वाली नावें फंसी हुई हैं।
ओडिशा सरकार ने 8 जिलों में 128 रेस्क्यू टीमें तैनात की हैं, और स्कूलों-आंगनवाड़ियों को 30 अक्टूबर तक बंद रखा गया है। 
ओडिशा में 24 ODRAF, 5 NDRF और 99 फायर सर्विस टीमों के 5 हजार कर्मचारी तैनात किए गए हैं। पश्चिम बंगाल:
मंगलवार से शुक्रवार तक दार्जिलिंग, कलिम्पोंग, मेदिनीपुर, 24 परगना, बर्धमान, बीरभूम और मुर्शिदाबाद जिलों में भारी बारिश और भूस्खलन की आशंका है।
बाकी राज्यों पर असर
तूफान के कमजोर पड़ने के बाद भी केरल, कर्नाटक, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और झारखंड में अगले तीन दिन तक बारिश जारी रहने की संभावना है।
केरल में अब तक दो लोगों की मौत हो चुकी है।
मोन्था नाम का मतलब
इस चक्रवात का नाम थाइलैंड ने दिया है।
“मोन्था” थाई भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ है — एक सुगंधित फूल।
लेकिन इस समय, यह फूल नहीं — खतरे का तूफान बनकर तटीय इलाकों की ओर बढ़ रहा है।






































