सिटी बिग न्यूज | हिसार
ख़बरें बता रही हैं प्रदूषण के कारण हमारी वायु सांस लेने लायक भी नहीं रही। भारत के वातावरण को अगर हमें सांस लेने लायक बनाना है तो यज्ञ ही एकमात्र उपाय है। यज्ञ ही विश्व में कोरोना को दोबारा आने से रोक सकता है।
यह विज्ञान भी प्रमाणित कर चुका है कि गाय के घी व औषधियों सहित 1 घंटा यज्ञ किया जाए तो इससे आसपास की 100 यार्ड भूमि को एक महीने तक वातावरण को संक्रमण मुक्त किया जा सकता है। यह बात जगतगुरु त्रिपुरा पीठाधीश्वर चक्रवर्ती यज्ञ सम्राट पूज्य श्रीश्री 1008 श्री हरिओम जी महाराज ने अग्रसेन भवन में आयोजित पत्रकार वार्ता को सम्बोधित करते हुए कही।
हरिओम जी महाराज आगामी 18 से 27 मार्च, 2025 तक
कुरुक्षेत्र के केशव (थीम) पार्क में आयोजित नौ दिवसीय 1008 कुण्डीय शिव-शक्ति महायज्ञ का निमंत्रण देने के लिए जागृति यात्रा के तहत हिसार पहुंचे थे।
उनके साथ मौजूद अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय मंत्री स्वामी कृष्णानन्द जी महाराज ने पत्रकारों को सम्बोधित करते हुए कहा कि यज्ञ को सनातन में सर्वश्रेष्ठ कर्म बताया गया है क्योंकि प्रकृति के मूल स्वरूप की रक्षा व प्रदूषण मुक्त वातावरण के लिए यज्ञ ही एकमात्र उपाय है।
हरिओम जी महाराज यज्ञ का प्रचार प्रसार करके विश्वकल्याण का सबसे बड़ा काम कर रहे हैं।
कार्यक्रम के मुख्य संयोजक एवं अग्रसेन भवन हिसार के प्रधान अंजनी कुमार खारिया ने कहा कि कुरुक्षेत्र में होने वाले 1008 कुण्डीय महायज्ञ में सभी राज्यों व हरियाणा के जिलों में सबसे ज्यादा सहयोग व कुंडों का निर्माण एवं संचालन होगा। जनकल्याणकारी कार्यों में हिसार हमेशा अव्वल रहा है।
इस अवसर पर मुख्य रूप से कार्यक्रम के सह-संयोजक दीपक गर्ग, एन. के. गोयल, जगदीश तायल, निरंजन गोयल, अनिल सिंगला मंगाली वाले, दुनिचंद गोयल, संजय डालमिया, सुरेन्द्र बागड़ी, बलवंत सोनी, सुन्दर बगला, नरेंद्र मेचु, आशुतोष परुथी, युवा मंडल अध्यक्ष प्रदीप गोयल, महिला मंडल प्रधान श्रीमती आशु परुथी, कीर्ति रतन पाबड़ा, जागृति यात्रा हिसार मंडल संयोजक ज्योति प्रकाश कौशिक, एबीवीपी के राष्ट्रीय पदाधिकारी सुनील भारद्वाज, सुरेश सिंगल, मुकेश बंसल, भगवान परशुराम जनसेवा समिति के संस्थापक योगेन्द्र शर्मा आदि मौजूद थे।
इसके बाद हरिओम जी महाराज के हिसार आगमन के उपलक्ष्य पर 51 कुंडों पर 108 जोड़ों ने यज्ञ किया। यज्ञ के बाद यज्ञ सम्राट हरिओम जी महाराज के सानिध्य में स्थानीय शिष्यों व अन्य श्रद्धालुओं के साथ अग्रसेन भवन से शुरू करके पूरे शहर में नगर परिक्रमा की गयी। जिसमें हिसारवासियों को कुरुक्षेत्र के 1008 कुण्डीय महायज्ञ के लिए निमंत्रण दिया।







































