हरियाणा की राजनीति में पूर्व वित्त मंत्री प्रो. संपत सिंह के इस्तीफे के बाद माहौल गर्म हो गया है, और कांग्रेस में अब खुलकर मतभेद सामने आने लगे हैं।
आज ( 4 NOVEMBER ) कांग्रेस नेता अनिल मान ने हिसार में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर संपत सिंह पर पलटवार किया।

2019 के चुनाव में कांग्रेस ने अनिल मान को नलवा सीट से टिकट दिया था, जबकि संपत सिंह को काट दिया गया था। अनिल मान उस चुनाव में हारे थे, और तब से दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक संघर्ष जारी है।

अनिल मान ने पूरे जोश से प्रतिक्रिया दी जब संपत सिंह ने कांग्रेस छोड़कर हुड्डा परिवार पर हमला साधा।
उनका दावा है-
पार्टी को संपत सिंह की जरूरत सबसे अधिक थी जब वे इनेलो छोड़ गए। चौटाला परिवार पर आरोप लगाने के बाद वे पार्टी से बाहर चले गए। फिर, टिकट नहीं मिलने पर BJP में चले गए और अब फिर से इनेलो से जुड़ गए हैं। अब यह उनकी आदत है।”
“हुड्डा ने जितवाया था, वरना हार निश्चित थी।”
अनिल मान ने कहा कि संपत सिंह ने कांग्रेस में शामिल होने पर फतेहाबाद से टिकट की मांग की थी, लेकिन पार्टी के सर्वे में वे वहां हार रहे थे।
“ऐसे में भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने अपने प्रभाव से उन्हें नलवा से टिकट दिलाया। नलवा में भी काफी विरोध था, लेकिन हुड्डा साहब ने सबको साथ लाकर जीत दिलाई। अब वही संपत सिंह उन्हीं पर उंगली उठा रहे हैं — ये ठीक नहीं है।”
“मंत्री न बनने की वजह खुद की पॉलिटिक्स थी”
अनिल मान ने स्पष्ट किया कि संपत सिंह को मंत्री नहीं बनाए जाने के पीछे कोई साजिश नहीं थी।
“कांग्रेस में जब कोई नेता दूसरी पार्टी से आता है, तो उसे सीनियरिटी दोबारा बनानी पड़ती है। उसे शुरुआत शून्य से करनी होती है। उस वक्त हमारे पास कई अनुभवी नेता थे जो पहले से मंत्रीमंडल में थे। पार्टी ने संपत सिंह से कभी वादा नहीं किया था कि जीतते ही मंत्री बना देंगे।”
अनिल मान ने कहा कि संपत सिंह का कांग्रेस छोड़ना कोई नई बात नहीं है; वे हर बार जब मौका मिलता है, अपना रास्ता बदलते हैं।
“राजनीति में विचारों की लड़ाई हो सकती है, लेकिन कुर्सी के लिए पार्टी बदलना जनता भी पसंद नहीं करती,”
मान ने कहा।
हिसार की यह प्रेस कॉन्फ्रेंस कांग्रेस में लंबे समय से चल रहे अंदरूनी विवाद को फिर से उजागर करती है, जो संपत सिंह के इस्तीफे के बाद और गहरा गया है।






































