हिसार जिले के नारनौंद में हटाए गए सफाई कर्मचारी अपनी दोबारा नियुक्ति की मांग को लेकर लगातार सातवें दिन भूख हड़ताल पर बैठे रहे। शनिवार को इस आंदोलन को स्थानीय व्यापार मंडल का समर्थन मिला, जिससे कर्मचारियों का मनोबल और मजबूत हुआ। व्यापारियों ने चेतावनी दी कि कर्मचारियों की बहाली न होने पर शहर की सफाई व्यवस्था ठप पड़ सकती है।
सुबह धरनास्थल पर भाजपा एससी मोर्चा के जिला प्रभारी जोरा सिंह और ब्लॉक प्रधान सुरेश कुमार पहुंचे, जिनके सामने कर्मचारियों ने अपना मांग पत्र रखा। धरने की अध्यक्षता ब्लॉक प्रधान मंशा राम ने की, जबकि संचालन प्रदीप लोट ने संभाला। सभी कर्मचारियों ने एक सुर में कहा कि जब तक हटाए गए साथियों की नौकरी बहाल नहीं होती, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।

नारनौंद ब्लॉक प्रधान को ज्ञापन सौंपा।
व्यापार मंडल के प्रधान प्रदीप ढांडा, वरिष्ठ उप प्रधान हर्ष पेटवाड़ सहित कई व्यापारी प्रतिनिधि भी कर्मचारियों के साथ खड़े दिखे। उन्होंने हड़ताली कर्मियों को फूल मालाएं पहनाकर समर्थन जताया और कहा कि सफाई कर्मचारी शहर की स्वच्छता व्यवस्था की रीढ़ हैं। ढांडा ने आरोप लगाया कि नगर पालिका ने तीन महीने काम करवाने के बाद कर्मचारियों को अचानक हटाकर उनके परिवारों को संकट में धकेल दिया है।
कर्मचारी नेता धर्मवीर ने कहा कि सरकार सफाई कर्मचारियों की समस्याओं को नजरअंदाज कर रही है, जबकि यह सेवा आज भी सबसे अहम बुनियादी जरूरतों में गिनी जाती है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि मांगें जल्द नहीं मानी गईं तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
पूर्व प्रधान नरेश ने नगरपालिका पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कौशल रोजगार निगम के माध्यम से गलत तरीके से भर्ती दिखाकर अब कर्मचारियों को हटाया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि समाधान न होने पर प्रदेश की विभिन्न ट्रेड यूनियनें भी इस संघर्ष में उतरेंगी, जिससे आंदोलन और उग्र हो सकता है।
नारनौंद में यह विवाद अब लगातार बढ़ रहा है और यदि जल्द हल नहीं निकला, तो शहर की सफाई और स्थानीय व्यवस्था दोनों प्रभावित हो सकती हैं।




































