हिसार जिले के बालसमंद इलाके में खारिया और डोभी गांवों के बीच खुले एक नए शराब ठेके को लेकर ग्रामीण महिलाओं में आक्रोश । शुक्रवार को महिलाएं सड़क किनारे धरने पर बैठ गईं और ठेका हटाने की मांग की।
धरने में शामिल संतोष, गुड्डी, लीला और कल्पना समेत कई महिलाओं ने कहा कि इस जगह पर पहले कभी शराब ठेका नहीं था। अब ठेका खुलने से गांव का माहौल खराब होने लगा है। उनके मुताबिक, शराब पीने के बाद लोग रास्ते में खड़े होकर महिलाओं और लड़कियों से गलत व्यवहार करते हैं, जिससे आस-पास की ढाणियों में रहने वाले परिवारों में डर और असहजता भाव बढ़ रहा है। 
महिलाओं का कहना है कि ठेका डोभी और खारिया गांवों से करीब 10 एकड़ की दूरी पर खोला गया है, लेकिन इतनी नजदीकी में भी ग्रामीणों की सुरक्षा और शांति प्रभावित हो रही है। उन्होंने प्रशासन से तुरंत प्रभाव से ठेका बंद करने की मांग की और चेतावनी दी कि अगर सुनवाई नहीं हुई तो वे अनिश्चितकालीन धरना जारी रहेगा ।
दूसरी ओर, ठेकेदार राजेंद्र ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया। उन्होंने कहा कि उन्होंने विभाग से सभी आवश्यक अनुमति लेकर ही ठेका शुरू किया है। राजेंद्र के मुताबिक, ठेका खारिया गांव की जमीन पर है और डोभी से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर स्थित है। उनका दावा है कि “कोई भी शराबी गलत व्यवहार नहीं करता, यह सब महिलाओं को बहकाकर रची गई साजिश है।”
राजेंद्र ने बताया कि पहले ठेका डोभी गांव के पास खोलने की योजना थी, लेकिन वहां कन्या गुरुकुल होने की वजह से ग्रामीणों ने विरोध किया। बाद में प्रशासन ने ठेका खारिया की तरफ शिफ्ट कर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि जुलाई में जब पहली बार यह विरोध हुआ था, तब भी गुरुकुल और गांव की गरिमा को लेकर विरोध हुआ था।
फिलहाल पुलिस और प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं, जबकि ग्रामीण महिलाएं अपने रुख पर अटल हैं—उनका कहना है, “गांव के पास शराब ठेका नहीं चाहिए, चाहे कितनी भी परमिशन क्यों न मिल जाए।”




































