सिटी बिग न्यूज | हिसार
शहर में पानी की समस्या विकराल रूप धारण कर चुकी है। एक तरफ लोगों को जहां पानी की सप्लाई नहीं मिल पा रही थी वहीं अब लोगों के घरों में पानी के टैंकर पहुंचाने वाले ठेकेदारों ने भी पानी भेजने से मना कर दिया गया है। ठेकेदारों का कहना है कि पहले उनकी पेमेंट की जाए तभी वे आगे पानी भेज सकेंगे। यह बात हिसार संघर्ष समिति के प्रधान जितेंद्र श्योराण ने शहर में व्याप्त पानी की समस्या को लेकर कही।
जितेंद्र श्योराण ने कहा कि बालसमंद नहर में कई हफ्ते बंद रहने के बाद मुश्किल से पानी आया था लेकिन दो-तीन पानी आने के बाद ही आगामी 3 तारीख को नहर बंद होने की सूचना मिली। विभाग ने लोगों के जख्मों पर नमक छिडक़ते हुए इसे आज ही बंद कर दिया जिससे शहर में पानी की समस्या और गंभीर रूप लेगी।
शासन-प्रशासन की इस कार्यवाही से लोगों में भारी रोष है और वे इसका विरोध जताने के लिए जन प्रतिनिधियों के घरों का घेराव बनाने की योजना बना रहे हैं यदि जल्द ही समस्या का समाधान नहीं हुआ तो शहर के लोग घेराव के लिए विवश होंगे क्योंकि ये जन प्रतिनिधि न तो फोन उठाते हैं और न ही लोगों के बीच आकर उनकी समस्याओं के समाधान का कोई रास्ता निकालते हैं।
श्योराण ने कहा कि जनता की पानी की समस्या को दूर करने की बजाय शहर की सरकार लोगों की रोजी-रोटी पर लात मारने में जुटी है। रेहड़ी-फड़ वालों को अतिक्रमण के नाम पर खदेड़ा जा रहा है और उनके रोजगार को खत्म करने का काम शहर की सरकार कर रही है।
उसे चाहिए कि पहले वह शहरवासियेां की पानी की समस्या का समाधान करे और लोगों को पानी कैसे मुहैया करवाया जाए इस बारे में योजना बनाए। प्रदेश की सरकार में हिसार के इतने लोग हैं लेकिन फिर भी हिसार शहर के लोग खुद को लावारिस समझ रहे हैं क्योंकि उनकी यहां पर कोई सुनने वाला नहीं है।
जितेंद्र श्योराण ने कहा कि जन प्रतिनिधियों की जिम्मेवारी बनती है वे अपने-अपने क्षेत्र की सुध लें और लोगों तक पानी पहुंचाने का कमा करें। उन्होंने कहा कि सरकार व प्रशासन लोगों के सब्र का इम्तहान न ले जल्द से जल्द पानी की समस्या समाधान किया जाए नहीं तो इसके लिए बड़ा आंदोलन झेलने के लिए तैयार रहे।




































