सिटी बिग न्यूज | हिसार-सिरसा
हरियाणा में बिजली बिलों का मुद्दा इन दिनों गरमाया हुआ है। कई उपभोक्ताओं के 10 से 20 गुना ज्यादा बिल आ गए, जबकि कुछ को लाखों रुपये तक के बिल मिले हैं। लोगों की चिंता बढ़ गई है कि ये भारी-भरकम बिल आखिर कैसे चुकाएं।
हालत यह है कि उपभोक्ता बिजली निगम के दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन बिलों को ठीक कराने में लंबा समय लग रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, राज्य में बिजली बिलिंग का ठेका एक निजी कंपनी को दिया गया है। इस कंपनी के कर्मचारियों ने बिना फील्ड विजिट के मैन्युअल तरीके से बिल बना दिए, जिससे हजारों उपभोक्ताओं के गलत बिल बन गए।
इस गड़बड़ी का खुलासा तब हुआ, जब कई लोग अपने ज्यादा बिल लेकर निगम दफ्तर पहुंचे। जब फिजिकल वेरिफिकेशन हुआ तो सामने आया कि कहीं मीटर रीडिंग ज्यादा दर्ज कर दी गई थी, तो कहीं बिल का प्रिंट ही गलत था।
बिजली मंत्री अनिल विज ने लिया संज्ञान
यह मामला विधानसभा में भी उठा, जहां इनेलो विधायक ने इसका मुद्दा जोरशोर से उठाया। इसके बाद बिजली मंत्री अनिल विज ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सभी ऑपरेशन सर्कल के अधीक्षक अभियंताओं (एसई) की मीटिंग चंडीगढ़ में बुलाई।
मीटिंग के दौरान सामने आया कि उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम (UHBVN) में 39,477 और दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) में 18,240 गलत बिल बनाए गए हैं। यानी कुल मिलाकर 57,717 बिल गलत निकले।
मंत्री विज ने कंपनी को फटकार लगाते हुए एक महीने का अल्टीमेटम दिया है कि सभी गलत बिलों को सही किया जाए, वरना सख्त कार्रवाई की जाएगी।
पुराना सिस्टम था बेहतर
पहले यह कार्य फील्ड में तैनात रिटायर्ड फौजियों द्वारा किया जाता था, जो मीटर की सटीक रीडिंग लेकर बिल बनाते और खुद ही उपभोक्ता से राशि लेकर निगम में जमा कराते थे। उस समय गलत बिलों की शिकायतें बहुत कम होती थीं।
अब केवल बिल बनाने का काम निजी कंपनी को दिया गया है, जबकि बिल वसूली डिवीजन स्तर पर होती है। यही कारण है कि कई उपभोक्ता 2-3 महीने तक दफ्तरों के चक्कर काटने के बाद भी समझौता करने को मजबूर हुए और 4,000 से लेकर 9,000 रुपये तक के बिल चुकाने पड़े।




































