— मुआवजा न मिलने पर अनिश्चितकालीन धरने का ऐलान
हिसार जिले की सब तहसील बालसमंद के मुख्य गेट पर आज किसान फिर सड़क पर उतर आए।
अखिल भारतीय किसान सभा कमेटी और स्थानीय ग्रामीणों ने मिलकर सरकार के खिलाफ धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया है।
किसान नेता संदीप धीरणवास ने बताया कि हाल ही में हुई लगातार बारिश ने इलाके में तबाही मचा दी — खेतों में खड़ी फसलें जलमग्न हो गईं, कई किसानों के घर और दुकानें तक क्षतिग्रस्त हो गईं।
किसानों का आरोप है कि सरकार ने नुकसान का ब्यौरा तो मांगा, लेकिन अब तक न मुआवजा मिला, न बीमा राशि। किसानों ने चेतावनी दी है —
“जब तक खाते में मुआवजा नहीं, तब तक धरना खत्म नहीं।”
🚜 धरना स्थल पर तय होगी आगे की रणनीति
किसानों ने बालसमंद गेट पर अस्थायी पंडाल डालकर अनिश्चितकालीन धरने का ऐलान किया है।
आज किसान संगठन अपनी आगे की रणनीति यहीं तय करेंगे।
उनकी मांग है कि सरकार तुरंत बारिश से हुए नुकसान की भरपाई करे, साथ ही डीएपी खाद की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करे और मूंग-बाजरे की सरकारी खरीद को बालसमंद अनाज मंडी में जल्द शुरू किया जाए।
🌊 27 गांवों में अब भी पानी भरा — 30 हजार एकड़ भूमि डूबी
उधर, प्रशासन के लिए भी यह चुनौती बनी हुई है। जिले के 27 गांवों के खेतों में अब भी पानी भरा हुआ है।
करीब 30 हजार एकड़ जमीन पर फसलें डूब चुकी हैं।
डीसी अनीश यादव ने अधिकारियों को आदेश दिए हैं कि 10 दिन के भीतर खेतों से पानी की निकासी पूरी करें। उन्होंने कहा कि यदि अतिरिक्त संसाधनों की जरूरत पड़े, तो तुरंत उपलब्ध कराए जाएं।
🚧 ड्रेन में जाएगा खेतों का पानी
प्रशासन ने योजना बनाई है कि खेतों में भरे पानी को नजदीकी ड्रेनों में डाला जाए, ताकि भूमि जल्दी सूख सके और किसान दोबारा बुवाई कर सकें।
एक ओर खेतों में पानी, दूसरी ओर किसानों की आंखों में उम्मीद का सैलाब —
बालसमंद का यह धरना अब सिर्फ एक मांग नहीं, बल्कि किसान के हक की पुकार बन चुका है।




































