सिटी बिग न्यूज | सिरसा
हरियाणा की राजनीति में अहम सिरसा नगर परिषद चुनाव में एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की। वीर शांति स्वरूप बाल्मीकि जनता द्वारा सीधे चुने गए पहले चेयरमैन बने।
चौटाला परिवार के गढ़ में इंडियन नेशनल लोकदल (INLD) और जननायक जनता पार्टी (JJP) की जमानत जब्त हो गई, जबकि कांग्रेस आंतरिक गुटबाजी में उलझी रही। निर्दलीय प्रत्याशी राजेंद्र कुमार ने शुरुआत में बीजेपी को कड़ी टक्कर दी और तीसरे स्थान पर रहे।
चुनाव के प्रमुख आंकड़े:
🔹 कुल वोटर: 1,60,036
🔹 मतदान हुआ: 90,240
🔹 जमानत बचाने के लिए आवश्यक वोट: 11,280
✅ बीजेपी (शांति स्वरूप बाल्मीकि): 41,061 वोट
✅ कांग्रेस (जसविंदर कौर): 28,682 वोट
✅ निर्दलीय (राजेंद्र कुमार): 12,705 वोट
❌ INLD: 3,037 वोट
❌ JJP: 1,676 वोट
❌ AAP: 1,462 वोट
❌ निर्दलीय अशोक कुमार: 801 वोट (नोटा से भी कम)
चौटाला परिवार के गढ़ में BJP का दबदबा
चौटाला परिवार की INLD और JJP सिरसा में अपना वर्चस्व बचाने में नाकाम रही। पिछले 38 साल में 20 साल सत्ता में रहने के बाद पिछले 11 वर्षों से सिरसा की नगर परिषद पर चौटाला परिवार का कोई प्रभाव नहीं रहा।
2016 में भी बीजेपी ने नगर परिषद चुनाव जीता था, लेकिन तब उसे कांग्रेस विधायक गोकुल सेतिया के परिवार का समर्थन प्राप्त था। 2018 में चेयरपर्सन शीला सहगल की कुर्सी चली गई थी, और तब से सत्ता में अस्थिरता बनी रही।
JJP का सबसे खराब प्रदर्शन
पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला के बड़े बेटे अजय चौटाला की पार्टी JJP और छोटे बेटे अभय चौटाला की INLD—दोनों ही पार्टियां बुरी तरह हारीं। खासकर JJP को INLD से भी कम वोट मिले, जिससे सिरसा में उसकी स्थिति और कमजोर हो गई।
📌 इस जीत के साथ बीजेपी ने साबित कर दिया कि सिरसा में उसकी पकड़ मजबूत हो चुकी है, जबकि चौटाला परिवार की दोनों पार्टियां लगातार कमजोर होती जा रही हैं।




































