सिटी बिग न्यूज | हिसार
न्यू यशोदा पब्लिक स्कूल में महान शिक्षाविद् यशोदा माथुर का 100वां जयंती समारोह एवं एलुमिनी मीट हर्षोल्लासपूर्वक मनाया गया। न्यू यशोदा स्कूल का परिसर इस भव्य कार्यक्रम का गवाह बना।
समारोह की शोभा को कार्यक्रम में पहुंचे 1946 से 2018 बैच के एलुमिनीज ने चार चांद लगा दिए जिसमें डॉक्टर, इंजीनीयर, शिक्षाविद, सैन्य अधिकारी, बड़े कारोबारी, वकील एवं उच्च पदों पर आसीन अनेक गणमान्य हस्तियां शामिल थीं जिसमें देश के विभिन्न हिस्सों से करीब 500 से अधिक पूर्व छात्र पहुंचे।
समारोह में सभी ने अपने अनुभव सांझा किए और बहुत से पूर्व छात्र इस अवसर पर भावुक नजर आए। यह समारोह स्कूल की 50 वर्ष की उपलब्धियों का जश्न मनाने के लिए आयोजित किया गया।
रविवार को आयोजित इस कार्यक्रम में उपस्थित हुए पूर्व छात्रों ने संवादात्मक और मनोरंजक गतिविधियां आयोजित की गई, जिनमें पुराने दोस्तों ने नए किस्सों को साझा किया। इस अवसर पर स्कूल के डायरेक्टर जगमेंद्र सिंह ने सभी एलुमिनीज व अतिथियों ने अपनी समृद्ध परंपरा और मेहमान नवाजी के साथ इन प्रतिष्ठित पूर्व छात्रों का स्वागत किया।
इस आयोजन में न्यायाधीश कृष्णकांत, नीरज खुराना एपल इंडिया गुडग़ांव, डॉ. प्रीति आईवीएफ एक्सपर्ट, डॉ. अमित भुटानी ऑर्थोपेडिक, डॉ. निधि शर्मा कोर्डियोलोजिस्ट, ऋतु सिंह साईंटिस्ट, ऋतु दलाल इनर चाइल्ड हिलर, डॉ. कपिल ऋषि अग्रवाल आई सर्जन, डॉ. संचित मैनन ईएनटी, जितेंद्र मित्तल इम्पीरियम रिजॉर्ट, दीपिका वशिष्ठ ब्रांच मैनेजर एसबीआई सहित अन्य प्रतिष्ठित व्यक्तित्व शामिल हुए। इन पूर्व छात्रों ने इंजीनियरिंग, प्रशासन, विज्ञान और उद्योग के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान दिया है। कार्यक्रम के दौरान संवादात्मक और मनोरंजक गतिविधियां आयोजित की गई।
निदेशक डॉ. जगमेंद्र सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि एक छोटा पौधा जो महान शिक्षाविद् यशोदा माथुर ने लगाया आज वह एक वट वृक्ष बन चुका है। आज यहां देखकर मुझे खुशी हो रही है यशोदा माथुर का यश पूरे देश में फैला हुआ है क्योंकि इस स्कूल के छात्र आज पूरे देश में समाज में अहम स्थान पाकर यहां की ख्याति को फैला रहे हैं।
हिसार की एक महान दूरदृष्टा यशोदा माथुर ने शिक्षाविद के रूप में चार बच्चों के साथ आधुनिक शिक्षा की ज्योति प्रज्जवलित की। उनका लड़कियों की शिक्षा के प्रति विशेष हृदयग्राही प्रेम रहा और वे लड़कियों के माता-पिता के शिक्षा के प्रति मानसिक दृष्टिकोण को भरसक प्रयास व संघर्ष के बाद अंतत: परिवर्तित करने में सफल रहीं।
उन्होंने सम्मान, उत्साह, समर्पण और प्रतिबद्धता के साथ इसी भागीरथी प्रयास में अपना जीवन निस्वार्थ भाव से समर्पित किया। करूणा, प्रेम, वात्सल्य, शिक्षा, संस्कार व नवाचार ही उनका स्वरूप, कर्म ही उनकी पूजा, ‘श्रमेव जयते’ ही उनका विश्वास था।




































