सिटी बिग न्यूज | हिसार
डेरा सच्चा सौदा प्रमुख राम रहीम को अपने डेरे की गतिविधियों से जुड़े फैसले लेने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। पैरोल पर आने का इंतजार करना या जेल में जाकर उनसे राय लेना डेरा मैनेजमेंट के लिए एक जटिल प्रक्रिया बन गई है। इस समस्या का समाधान निकालने के लिए राम रहीम अपनी सबसे करीबी अनुयायी हनीप्रीत को पावर ऑफ अटॉर्नी देने की योजना बना रहा है। इससे हनीप्रीत को डेरे के महत्वपूर्ण निर्णय लेने की कानूनी शक्ति मिल जाएगी।
1. हनीप्रीत का मुख्य शिष्य होना
राम रहीम पहले ही हनीप्रीत को अपना मुख्य शिष्य घोषित कर चुका है। फरवरी 2022 में पहली बार पैरोल पर आने के बाद उसने अपने आधार कार्ड और परिवार पहचान पत्र में बदलाव करवा लिए थे। उसने पिता के स्थान पर अपने गुरु सतनाम सिंह का नाम अंकित करवाया और खुद को उनका मुख्य शिष्य घोषित कर दिया। परिवार पहचान पत्र में भी उसने अपनी पत्नी और मां का नाम दर्ज नहीं कराया, बल्कि केवल हनीप्रीत को मुख्य शिष्य के रूप में शामिल किया।
2. डेरा परंपरा के अनुसार गद्दी का वारिस
डेरा सच्चा सौदा की परंपरा के अनुसार, मौजूदा गद्दीनशीन का मुख्य शिष्य ही उसका उत्तराधिकारी बनता है। चूंकि वर्तमान में राम रहीम डेरा प्रमुख है और उसने हनीप्रीत को अपना मुख्य शिष्य घोषित किया है, इसलिए भविष्य में डेरा की गद्दी उसे सौंपे जाने की संभावना प्रबल हो गई है।
3. पारिवारिक विवाद और विदेश गमन
राम रहीम का परिवार हनीप्रीत के साथ चल रहे मतभेदों के कारण डेरा से दूर हो चुका है। उसकी बेटी अमरप्रीत, चरणप्रीत कौर और बेटा जसमीत अब विदेश में बस चुके हैं। हालांकि, उसकी मां नसीब कौर और पत्नी हरजीत कौर अभी भी देश में हैं, लेकिन वे डेरे की गतिविधियों से अलग हो चुकी हैं। सूत्रों के अनुसार, परिवार हनीप्रीत के बढ़ते प्रभाव से असंतुष्ट था, क्योंकि वह डेरे के आंतरिक मामलों में गहराई से हस्तक्षेप कर रही थी।
4. पॉलिटिकल फैसलों का अधिकार
राम रहीम ने डेरे से जुड़े राजनीतिक फैसले लेने का अधिकार भी हनीप्रीत को सौंप दिया है। उसके परिवार के विदेश जाने के बाद हनीप्रीत की डेरे में दखलअंदाजी बढ़ गई थी। उसने डेरे के महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय लेने शुरू कर दिए थे। इस दौरान, उसने कई राजनीतिक नेताओं से मुलाकात भी की, जिससे डेरा मैनेजमेंट के अन्य सदस्यों के साथ उसका विवाद बढ़ता गया।
5. नाम परिवर्तन और उत्तराधिकारी की तैयारी
राम रहीम ने अक्टूबर 2022 में हनीप्रीत का नाम बदलकर ‘रूहानी दीदी’ (रुह दी) रख दिया था। यह बदलाव तब किया गया था जब वह 40 दिन की पैरोल पर बाहर आया था। इस कदम से यह संकेत मिलने लगा था कि राम रहीम डेरे की गद्दी उसे सौंपने की प्रक्रिया में है। इस तरह का नाम परिवर्तन आमतौर पर उत्तराधिकारी घोषित करने से पहले किया जाता है ताकि नई पहचान को आधिकारिक रूप से स्वीकार कराया जा सके।
6. सिरसा डेरा वापसी और पैरोल
राम रहीम 7.5 साल बाद 5 फरवरी को सिरसा डेरा में वापस पहुंचा। उसे 30 दिनों की पैरोल दी गई, जो दिल्ली विधानसभा चुनाव से ठीक एक सप्ताह पहले मिली थी। इससे यह अटकलें तेज हो गईं कि डेरा का प्रशासनिक नियंत्रण हनीप्रीत को सौंपने की प्रक्रिया जल्द ही पूरी हो सकती है।
निष्कर्ष
हनीप्रीत को पावर ऑफ अटॉर्नी दिए जाने के पीछे मुख्य कारण डेरा सच्चा सौदा की गद्दी का उत्तराधिकार सुनिश्चित करना है। राम रहीम के पैरोल पर होने या जेल में रहने के कारण डेरे के निर्णय लेने में देरी हो रही थी। इस समस्या के समाधान के रूप में हनीप्रीत को कानूनी अधिकार देने की प्रक्रिया शुरू की गई है, ताकि वह डेरे के राजनीतिक, प्रशासनिक और वित्तीय फैसले स्वतंत्र रूप से ले सके। इससे यह भी संकेत मिलता है कि भविष्य में डेरा की गद्दी आधिकारिक रूप से हनीप्रीत को सौंपी जा सकती है।




































