पर्यावरण को स्वच्छ और हरा-भरा बनाने के संकल्प के साथ वर्ल्ड क्लाइमेट चेंज (WCC) फाउंडेशन के संचालक स्वामी सहजानंद सरस्वती हाल ही में पुर्तगाल पहुंचे। वहां उनकी मुलाकात सूर्यवंशी इंटरनेशनल अखाड़ा के संस्थापक आचार्य महामंडलेश्वर देवेंद्र स्वामी (पुर्तगाली बाबा) से हुई, जिसमें पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर गहन चर्चा की गई। दोनों महापुरुषों ने इस बात पर सहमति जताई कि 2025 के कुंभ मेले में पर्यावरण बचाने की मुहिम को और भी मजबूत किया जाएगा।
पुर्तगाली बाबा ने WCC फाउंडेशन की पर्यावरण रक्षा की पहल की सराहना की और स्वामी सहजानंद को आश्वासन दिया कि वे अपने अखाड़े के सभी महामंडलेश्वरों के साथ मिलकर इस अभियान को आगे बढ़ाएंगे। विशेष रूप से, कुंभ मेले के दौरान अखाड़ा 50 हजार कपड़े के थैले निःशुल्क वितरित करेगा, ताकि प्लास्टिक का उपयोग कम हो और पॉलिथीन मुक्त वातावरण को प्रोत्साहन मिले। यह कदम WCC फाउंडेशन के ‘पॉलिथीन मुक्त भारत’ अभियान का हिस्सा होगा।
स्वामी सहजानंद का यूरोप में पर्यावरण जागरूकता अभियान
स्वामी सहजानंद पिछले चार महीनों से फ्रांस और यूरोप के अन्य 25 देशों की यात्रा पर हैं, जहां वे विभिन्न धर्मावलंबियों से मिलकर पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता फैला रहे हैं। इस यात्रा का उद्देश्य न केवल पर्यावरणीय समस्याओं के बारे में जागरूकता फैलाना है, बल्कि उन पर ठोस कदम उठाने के लिए लोगों को प्रेरित करना भी है। यह अभियान आगे भी जारी रहेगा, जिसमें स्वामी सहजानंद अधिक से अधिक देशों में जाकर पर्यावरण सुरक्षा के संदेश का प्रचार करेंगे।
प्रधानमंत्री मोदी के स्वच्छता अभियान से प्रेरणा
पुर्तगाली बाबा ने चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “कचरा इधर-उधर न फेंकने” के आह्वान का उल्लेख किया, जिसका सकारात्मक असर पूरे भारत में देखा गया। उन्होंने कहा कि इसी प्रकार अब समय की मांग है कि लोग दूषित पर्यावरण से मुक्ति पाने के लिए पृथ्वी को स्वच्छ रखने में योगदान दें। उन्होंने यह भी कहा कि स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण से न केवल समाज में सकारात्मक परिवर्तन आएगा, बल्कि इससे लोगों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर भी बेहतर असर होगा।
सूर्यवंशी इंटरनेशनल अखाड़ा अपने अनुयायियों से अपील करेगा कि वे अपने आसपास के क्षेत्रों में कचरा निपटान सही तरीके से करें और अधिक से अधिक पौधारोपण में भाग लें। बाबा का मानना है कि दूषित वातावरण का इंसानों के दिमाग पर गहरा असर होता है, जिससे अपराध और अन्य सामाजिक समस्याएं बढ़ती हैं। स्वच्छ और हरित वातावरण से समाज में एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा, जिससे पीढ़ियां सुरक्षित रहेंगी।
पर्यावरण जागरूकता की शुरुआत घर से
पुर्तगाली बाबा ने जोर देकर कहा कि पर्यावरण जागरूकता की शुरुआत सबसे पहले घर से ही करनी होगी। जब हर परिवार अपने घर और आसपास के क्षेत्रों को स्वच्छ रखने की जिम्मेदारी लेगा, तभी एक स्वच्छ और स्वस्थ समाज का निर्माण हो सकेगा। इसके लिए हमें गली-मोहल्लों से लेकर शहर, प्रदेश और फिर पूरे देश में जागरूकता फैलानी होगी। स्वच्छता केवल एक व्यक्तिगत जिम्मेदारी नहीं, बल्कि एक सामाजिक कर्तव्य है, जो हमारे भविष्य को सुरक्षित बनाएगा।
पुर्तगाली बाबा: एक परिचय
आचार्य महामंडलेश्वर देवेंद्र स्वामी, जिन्हें ‘पुर्तगाली बाबा’ के नाम से भी जाना जाता है, सूर्यवंशी इंटरनेशनल अखाड़ा (यूरोपियन यूनियन) के संस्थापक हैं। उनके नेतृत्व में इस अखाड़े की शाखाएं पूरे विश्व में फैली हुई हैं, और वर्तमान में अखाड़े से 235 महामंडलेश्वर जुड़े हुए हैं। पुर्तगाली बाबा ने सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार के लिए 100 से अधिक देशों का भ्रमण किया है। वे विदेशों में रह रहे भारतीयों को अपनी संस्कृति से जुड़े रहने और उसका संरक्षण करने का आह्वान करते रहे हैं।
पुर्तगाली बाबा के जीवन में स्वच्छता का महत्व एक व्यक्तिगत अनुभव से आया। 1985-86 में इटली यात्रा के दौरान, उन्होंने केला खाकर उसका छिलका सड़क पर फेंक दिया था, लेकिन वहां की एक स्थानीय महिला ने उसे उठाकर डस्टबिन में डाला। यह घटना बाबा के जीवन में एक प्रेरणा बन गई, जिसके बाद से वे सड़कों पर बिखरे पॉलिथीन और अन्य कचरे को एक थैले में इकट्ठा करके कूड़ेदान में डालते हैं। यह व्यक्तिगत जागरूकता का उदाहरण है कि कैसे छोटे-छोटे कदम बड़े बदलाव ला सकते हैं।
2025 कुंभ: एक अनोखी पहल
2025 का कुंभ मेला एक महत्वपूर्ण अवसर होगा, जहां लाखों श्रद्धालु इकट्ठा होंगे। ऐसे में WCC फाउंडेशन और सूर्यवंशी इंटरनेशनल अखाड़ा का यह संयुक्त प्रयास पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए एक प्रेरणादायक कदम होगा। कपड़े के थैलों का वितरण, प्लास्टिक के उपयोग में कमी और पौधारोपण जैसी पहलों के माध्यम से यह अभियान न केवल मेले को स्वच्छ बनाएगा, बल्कि यह संदेश भी देगा कि पर्यावरण की सुरक्षा हम सभी की जिम्मेदारी है।
पर्यावरण बचाओ, भविष्य बचाओ!




































