सिटी बिग न्यूज
हिसार के डाबड़ा गांव में एक बार फिर उम्मीदों की लहर दौड़ गई थी। सेमीफाइनल की हार के बाद भी गांव के बेटे संजय कालीरावण के माता-पिता को भारतीय टीम की जीत का पूरा भरोसा था। शाम करीब 6:30 बजे, जब भारत ने स्पेन को हराकर कांस्य पदक जीता, तो गांव में ढोल-नगाड़ों की धुन गूंज उठी। संजय के परिवार और ग्रामीणों ने खुशी में झूमते हुए एक-दूसरे को बधाई दी।
गांव में “टीम इंडिया ज़िंदाबाद” और “हॉकी इंडिया ज़िंदाबाद” के नारे गूंजने लगे। हर कोई गर्व महसूस कर रहा था कि संजय ने ओलंपिक पदक विजेताओं की सूची में **हिसार का नाम दर्ज करा दिया है। संजय कालीरावण हिसार जिले से ओलंपिक में पदक जीतने वाले पहले खिलाड़ी बन गए हैं।
जीत के बाद संजय ने अपने कोच राजेंद्र सिहाग को वीडियो कॉल कर जीत के जश्न का नज़ारा दिखाया। हालांकि, संजय भावुक हो गए और कुछ बोल नहीं पाए। बाद में, संजय की मां ने खुशी व्यक्त करते हुए कहा, “जब मेरा बेटा गांव आएगा, तो मैं उसे देसी घी का चूरमा बनाकर स्वागत करूंगी। गांव में विजय जुलूस निकाला जाएगा।”

भगवान गणेश और हनुमान की मूर्ति साथ रखते हैं संजय
संजय की माता कौशल्या देवी ने बताया कि उनका बेटा भगवान गणेश और हनुमान का बड़ा भक्त है। जब भी वह किसी टूर्नामेंट में जाता है, तो अपनी साथ भगवान की मूर्तियां लेकर जाता है। वह रोज़ाना सुबह-शाम डेढ़ घंटे पूजा करता है। संजय की मां ने कहा कि आज बेटे ने सपना पूरा कर इतिहास रच दिया है। पहली बार में ही ओलंपिक में पदक जीतकर संजय ने नाम रोशन किया है।
मां ने संजय को बताई थी तीन महत्वपूर्ण बातें
संजय ने अपने करियर की शुरुआत गांव डाबड़ा में कोच राजेंद्र सिहाग के पास की थी। कुछ साल वहां अभ्यास करने के बाद, वह चंडीगढ़ अकादमी में चला गया। जब संजय चंडीगढ़ गया, तो उसकी मां कौशल्या देवी ने उसे तीन महत्वपूर्ण बातें सिखाई थीं: “बेटा, कभी झूठ मत बोलना, कोच के सामने कभी मत बोलना और कभी चोरी मत करना। एक दिन तुम ज़रूर कामयाब हो जाओगे।” संजय ने आज यह कर दिखाया है।
हॉकी के प्रति जबरदस्त लगाव, कभी नहीं की छुट्टी
संजय के पिता नेकीराम ने बताया कि संजय ने 7 साल की उम्र में ही हॉकी खेलना शुरू कर दिया था। बचपन से ही उसे हॉकी खेलने का बहुत शौक था। हॉकी के प्रति उसकी दीवानगी इतनी थी कि उसने कभी अभ्यास से छुट्टी नहीं ली। घर आने के बाद भी वह सिर्फ हॉकी के बारे में ही बात करता था।
मैच से पहले माता-पिता ने की पूजा-अर्चना
संजय का मैच देखने के लिए कई रिश्तेदार इकट्ठे हुए थे। हर कोई बेसब्री से मैच के शुरू होने का इंतजार कर रहा था। मैच से पहले संजय के माता-पिता ने मंदिर में पूजा-अर्चना की और जीत की कामना की। जैसे ही भारत ने मैच जीता, गांव में जश्न की शुरुआत हो गई। पटाखे फोड़े गए और मिठाई बांटी गई।




































