सिटी बिग न्यूज
सुनने में बड़ा अजीब लग रहा होगा, लेकिन यह सच है। ऐसा कर दिखाया राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिकों ने। अब गधी के दूध से बना साबुन, बॉडी बटर और लिप बाम मार्केट में आने को तैयार है। राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र में बने इन उत्पादों को आईसीएआर ने #Certified किया है।
इन प्रोडक्ट्स को 15 व 16 जुलाई को दिल्ली में आईसीएआर के फाउंडेशन डे पर पेश किया गया था। बता दें कि ये तीन प्रोडक्ट्स तीन साल से बनाए जा रहे हैं। मगर अब जाकर इन्हें हरी झंडी मिली है। इन प्रोडक्ट्स से जुड़ी विधि कहें या टेक्नीक केरला की एक कंपनी डॉल्फिन आईबीए ने अश्व अनुसंधान केंद्र से ली है।
अब कंपनी ये उत्पाद तैयार कर मार्केट में बेचेगी। वैज्ञानिकों की मानें तो इन उत्पादों की विदेशों में काफी डिमांड है। गधी के दूध से बने इन उत्पादों में एंटी बैक्टीरियल, एंटी ऑक्सीडेंट और एंटी एजिंग की खूबियां हैं, जोकि त्वचा के लिए काफी फायदेमंद हैं। इन उत्पाद को लेकर बीकानेर के सेंटर में अब तक पांच बार ट्रेनिंग दी जा चुकी है।
ट्रेनिंग में 100 से ज्यादा प्रतिभागी पहुंचे थे। उन्हें गधों की उपयोगिता से लेकर उनके दूध से बनने वाले उत्पाद के बारे में जानकारी दी गई। केंद्र की मानें तो कोई भी व्यक्ति यहां ट्रेनिंग ले सकता है, बशर्ते एक बैच में कम से कम 10 प्रतिभागी हों। राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र के निदेशक डॉ. तरुण कुमार भट्टाचार्य ने बताया कि संस्थान को उम्मीद है कि ये उत्पाद आमजन को बहुत पसंद आएंगे।
इसके अलावा इससे गधों की उपयोगिता भी बढ़ेगी, जो दिनोंदिन कम होती जा रही है। राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र की प्रधान वैज्ञानिक डॉ. अनुराधा भारद्वाज ने बताया कि गधों की संख्या लगातार घटती जा रही है। ऐसे में इनका संरक्षण करना जरूरी है। आज लोगों को गधों की उपयोगिता के बारे में जानकारी नहीं है। इन उत्पाद बनाने का उद्देश्य भी ज्यादा से ज्यादा लोगों को गधाें की उपयोगिता को बढ़ाना है। फिलहाल राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र में करीब 22 गधी और 3 गधे हैं।




































