जवानी के बाद है आता बुढ़ापा
फिर अपने रंग है, दिखाता बुढ़ापा।
शान फिकी करता बुढ़ापा
गर्दन नीची करता बुढ़ापा।
इम्तिहान लेता है बुढ़ापा
परेशान करता है बुढ़ापा।
मजबूर करता है बुढ़ापा
अपनों से भी दूर करता है बुढ़ापा।
जीवन करता कठोर बुढ़ापा
सपने करता चकनाचूर, बुढ़ापा।
अहंकार नहीं छोड़ता बुढ़ापा
नींबू की तरह निचोड़ता बुढ़ापा।
‘पुष्कर’ बुढ़ापे से मत डरो
बुढ़ापे का, मुकाबला करो ।
खाने पीने पर लगाओ ध्यान
योग प्राणायाम का चलाओ अभियान।
– पुष्कर दत्त




































