हिसार। नगर निगम द्वारा हटाए गए अस्थाई सफाई कर्मचारियों का गुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा। निगम मुख्यालय के बाहर शुरू हुआ धरना सोमवार को छठे दिन में पहुंच गया है, जबकि 10 कर्मचारी अब भूख हड़ताल पर बैठ चुके हैं। कर्मचारियों का कहना है कि अगस्त में ‘सफाई पखवाड़ा’ के दौरान उन्हें अस्थाई नियुक्ति दी गई थी, लेकिन तीन महीने निरंतर काम करवाने के बाद अचानक सेवा से हटा दिया गया।
नगर पालिका कर्मचारी संघ के जिला प्रधान सोनू के अनुसार, कर्मचारियों को न तो किसी तरह की पूर्व सूचना दी गई और न ही सेवा अवधि बढ़ाने को लेकर कोई भरोसा। उन्होंने बताया कि अचानक मिली इस बेरोजगारी ने अनेक परिवारों के सामने रोज़ी-रोटी का संकट खड़ा कर दिया है। कर्मचारियों का आरोप है कि प्रशासन ने न तो उनके काम को महत्व दिया और न ही दोबारा नियुक्ति को लेकर कोई स्पष्ट नीति बनाई।
धरने पर बैठे कर्मचारियों ने सोमवार को भी सरकार और प्रशासन के खिलाफ ज़ोरदार नारेबाजी की। उनका कहना है कि जब शहर की सफाई की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, तब उन्होंने दिन-रात मेहनत करके काम पूरा किया, लेकिन अब प्रशासन उनकी समस्याओं की ओर ध्यान ही नहीं दे रहा। कर्मचारी नेताओं ने बताया कि इस मामले को लेकर मेयर और निगम अधिकारियों से कई बार बातचीत की गई, लेकिन हर बार सिर्फ़ आश्वासन मिला, कोई ठोस निर्णय नहीं।
धरना स्थल पर पहुंचे ग्रामीण सफाई कर्मचारी यूनियन के प्रतिनिधियों ने भी हटाए गए कर्मचारियों को समर्थन दिया और शीघ्र समाधान की मांग की। यूनियन नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि करीब 200 हटाए गए कर्मियों को जल्द दोबारा नियुक्त नहीं किया गया, तो प्रदेश स्तरीय कमेटी के साथ मिलकर बड़े आंदोलन की घोषणा की जाएगी।

कर्मचारियों को सम्बोधित करते हुए कर्मचारी नेता
धरने पर बैठे कर्मचारी साफ़ कहते हैं कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जातीं, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।




































