सिटी बिग न्यूज | हिसार
ज्योतिष शास्त्र में नक्षत्रों के अनुसार नवजात शिशु का नाम रखा जाता है। ऐसा उसके जीवन में तरक्की के लिए जरूरी समझा जाता है। ज्यादातर अभिभावक बच्चे का नामकरण तो नक्षत्रों के अनुसार करवा लेते हैं लेकिन घर में अपने हिसाब से उसे पुकारने लगते हैं।
यह बात एस्ट्रोलॉजर प्रदुमन सूरी ने विद्युत नगर में आयोजित ज्योतिष की पाठशाला कार्यक्रम में कही। उन्होंने कहा कि हर नवजात शिशु रोने के अलाप के अंत में अक्षर बोलता है, वही अक्षर उसकी वास्तविक उर्जा है। नक्षत्र में भी रोने के अंत वाला अक्षर ही नामकरण के लिए सुझाया जाता है।
बच्चे को संबोधन में उसी अक्षर वाला नाम हो तो बच्चा पढने-लिखने और अन्य गतिविधियों में बाकी बच्चों से अव्वल रहता है। भारतीय परिवेश की बात करें तो गांव हो या शहर हर जगह अभिभावक नन्हे शिशु को सही नाम की बजाए बाबू, सोना, लड्डू जैसे स्वयं ही दूसरे लाड प्यार वाले नाम से घर में पुकारने लगते हैं।
ऐसा करने से बच्चे की हर तरह से ग्रोथ थम जाती है। नक्षत्र के हिसाब से बच्चे के नामकरण का फिर कोई औचित्य ही नहीं रह जाता है। कार्यक्रम का आयोजन नारायणी वेलफेयर सोसायटी से जुडी महिलाओं ने किया। सोसायटी की अध्यक्ष डॉ. गुंजन गोयल ने मुख्य अतिथि एस्ट्रोलॉजर प्रदुमन सूरी, तनिष्क की एचआर हेड डॉ. नीतू का स्वागत किया।
इस अवसर पर एस्ट्रो प्रदुमन ने उपस्थित महिलाओं को जन्म तिथि, मूलांक और वर्ष के हिसाब से व्यक्ति के स्वभाव, कार्यक्षेत्र में सफलता के टिप्स दिए। घर के वास्तु को ठीक करने में भी महिलाओं की विषेष दिलचस्पी रही। सूरी ने ब्रहमांड के 9 ग्रहों और 12 राशियों के अनुसार उनके प्रभाव, शनि महादशा और उनके उपाय, बेड की दिशा के साथ करवट लेने के तरीके भी बताए।
इस अवसर पर स्टाइल चेक क्लब से अनिल कक्कड़, समयजक योगा स्टूडियो से आचार्य कार्तिकेय, तुषार पोपली, वित्तीय मामलों के स्वतंत्र सलाहकार विमल नागपाल, पीएसईएल संचालक पंकज असीजा आदि मौजूद रहे।




































