सिटी बिग न्यूज | हिसार
हिसार के पुराना गवर्नमैंट कॉलेज मैदान में आयोजित तीन दिवसीय गीता जयंती महोत्सव के दौरान ब्रह्मर्षि सुभाष पत्री की दिव्य प्रेरणा से पिरामिड स्प्रिच्युअल सोसायटी मूवमेंट (पीएसएसम) हिसार की टीम ने हजारों लोगों को ध्यान की जानकारी दी और उन्हें ध्यान सिखाया व ध्यान करना क्यों जरूरी है इसके बारे में बताया।
इसके साथ ही टीम ने शाकाहार व आध्यात्मिकता विज्ञान के बारे में भी लोगों को जानकारी दी। अंतिम दिन जिला प्रशासन द्वारा टीम को सम्मानित भी किया गया। हिसार टीम की मास्टर वीना ने बताया कि इस दौरान लोगों को ‘आनापानसति ध्यान’ की विधि बताई गई।
मास्टर वीना ने बताया कि पीएएसएसएम की स्थापना ब्रह्मर्षि सुभाष पत्री जी द्वारा विश्व को ध्यान, शाकाहार, अहिंसा व आध्यात्मिक जगत बनाने के उद्देश्य से की गई है।
मास्टर वीना ने ध्यान के महत्व के बारे में बताया कि ध्यान हमारी आत्मिक उन्नति के लिए बेहद आवश्यक है। ध्यान सभी को जरूर करना चाहिए क्योंकि यह हमारे तन-मन-आत्मा को आनंदित करता है और हमें मानसिक व शारीरिक रूप से स्वस्थ रखता है जिससे हम अपनी आत्मा की उन्नति करके अपने जन्म को सफल बना सकते हैं।
उन्होंने बताया कि ‘आनापानसति ध्यान’ बेहद सरल है। पालि भाषा में ‘आनापानसति’ शब्द का अर्थ है आना-अंदर आती हुई साँस, अपान बाहर जाती हुई साँस, सति मिलन। आनापानसति ध्यान यानी अपनी प्राकृतिक साँसों के साथ एक हो जाना। उन्होंने ध्यान की विधि के बारे में बताया कि किसी भी सुखासन में बैठे। हाथों-पैरों को क्रॉस करें और आँखें बंद करके अपनी स्वाभाविक आती-जाती श्वास को सहज पूर्वक महसूस करें।
ध्यान से तन की स्वस्थता, बुद्धि का विकास, आत्मा का आनंद, एकाग्रता, मन की शांति, संकल्प शक्ति एवं कार्य कुशलता में वृद्धि, संबंधों में सामंजस्य, किसी भी परिस्थिति में निर्णय लेने की क्षमता आती है। ध्यान किसी भी समय, किसी भी स्थान पर, किसी भी परिस्थिति में किया जा सकता है।
प्रत्येक व्यक्ति को अपनी उम्र के हिसाब से उतने मिनट प्रतिदिन अवश्य ध्यान करना चाहिए यानी 20 साल 20 मिनट, 40 साल 40 मिनट। मास्टर वीना ने बताया कि ध्यान के अलावा भी पीएसएसम के 3 अन्य सिद्धांत हैं जिसमें शाकाहार, पिरामिड ऊर्जा और आध्यात्मिक विज्ञान शामिल हैं।
इस मौके पर पीएसएसएम की टीम में मास्टर वीना के अलावा अंजू पपनेजा, सुमन, गुरमीत, अंजू, बिमला, लता, शशि, राजेश, गुरचरण, सुनील, पवन, नरेश, मोहन आदि उपस्थित रहे।







































