शुक्रवार को कृषि विभाग कार्यालय नारनौंद में पराली प्रबंधन को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक का उद्देश्य था किसानों को पराली जलाने से होने वाले नुकसान के बारे में जागरूक करना और बेहतर विकल्पों का चयन करना। खंड कृषि अधिकारी पवन भारद्वाज ने बैठक को संबोधित किया। इस दौरान गांव-स्तर पर बनी समितियों के सदस्य भी उपस्थित थे।
कृषि अधिकारी पवन भारद्वाज ने बैठक में सरकार द्वारा चल रही पराली प्रबंधन योजनाओं, उपलब्ध तकनीक और मशीनरी के बारे में विस्तार से बताया। उनका कहना था कि पराली जलाने से मिट्टी की उर्वरता कम होती है और हवा में धुआं फैलने से प्रदूषण बढ़ता है, जो लोगों के स्वास्थ्य पर सीधा असर डालता है।

बैठक में मौजूद किसानों ने धान की पराली के बेहतर प्रबंधन के उपायों को जानने की इच्छा व्यक्त की। कृषि अधिकारी ने बताया कि आज पराली को खाद बनाने, पशु चारे के रूप में इस्तेमाल करने या बायो-डीकंपोजर के माध्यम से नष्ट करने के कई तरीके हैं। उन्होंने कहा कि पराली को जलाने की बजाय उसका उपयोग करना ही किसानों और पर्यावरण दोनों के लिए अच्छा है।
समिति के सदस्यों को निर्देश दिए गए कि वे किसानों से सीधे बातचीत करके उन्हें योजनाओं का लाभ लेने के लिए प्रेरित करें। साथ ही, पराली प्रबंधन के उपायों की सही जांच करके योग्य किसानों को लाभ मिलना सुनिश्चित करें।
खंड कृषि अधिकारी ने बताया कि रोटावेटर, हैप्पी सीडर और सुपर स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम विभाग की ओर से प्रदान किए जा रहे हैं। ताकि खेतों में पराली को बिना जलाए आसानी से नियंत्रित किया जा सके, किसानों को यह सुविधा जरूर लेनी चाहिए।
सभा के अंत में, सभी ने घोषणा की कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में किसानों को पराली जलाने से रोकेंगे और प्रदूषण-मुक्त वातावरण बनाने में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।




































